
मंगलवार को एक-एक बैड पर 5 बच्चों को उपचार के लिए भर्ती देखा गया जिसका सीधा मतलब है कि एक बैड पर 10 लोग हैं क्योंकि एक बच्चे के साथ उसकी मां उसकी देखभाल के लिए उस बैड पर मौजूद थी, ऐसे में न सिर्फ लोगों को दिक्कतों का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है बल्कि इस ब्लॉक में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से लेकर पैरामैडीकल स्टाफ को भी भारी मानसिक परेशानी का बोझ झेलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय चिकित्सालय में वर्तमान में सिर्फ एक ही शिशु रोग विशेषज्ञ कार्यरत है जिस पर जिला के हजारों बच्चों के स्वास्थ्य का जिम्मा है। यह बात और है कि जिला चम्बा में शिशु रोग विशेषज्ञ के 2 पद स्वीकृत हंै, जिसमें से लंबे समय से एक ही चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहा है। लोगों का कहना है कि चिकित्सकों की कमी के चलते ही अस्पताल प्रबंधन नए अस्पताल परिसर में भी रोगियों को भर्ती करने में खुद को असहाय पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह कम से कम देश के भविष्य के स्वास्थ्य की चिंता करके तो यहां शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति करे ताकि नए भवन में बच्चों को भर्ती किया जा सके।

